कीमत पर वफा का सौदा-हिन्दी कविता


जिंदगी के हर मोड़ पर
लोग मिल ही जाते हैं,
कभी हमें होता अपने कदम  भटकने का अहसास
होती हैरानी यह देखकर
उन्हीं रास्तों  को नया मानकर
लोग चले आते हैं।
कहें दीपक बापू
बेबस ज़माना,
जाने बस पैसा कमाना,
कीमत लेकर करता है वफा का सौदा,
विश्वास निभाने का नहीं, चर्चा का होता मसौदा,
ज़मीन पर जिंदा रहना आता नहीं
लोग पहाड़ों पर सांसों में सुगंध ढूंढने जाते हैं।

लेखक और कवि-दीपक राज कुकरेजा “भारतदीप”

ग्वालियर, मध्यप्रदेश 

Writer and poet-Deepak Raj Kukreja “Bharatdeep”

Gwalior, Madhya pradesh

कवि, लेखक एवं संपादक-दीपक ‘भारतदीप’ग्वालियर
jpoet, Writer and editor-Deepak ‘Bharatdeep’,Gwalior
http://zeedipak.blogspot.com

यह कविता/आलेख इस ब्लाग ‘दीपक भारतदीप की अभिव्यक्ति पत्रिका’ पर मूल रूप से लिखा गया है। इसके अन्य कहीं भी प्रकाशन की अनुमति नहीं है।

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टिप्पणियाँ

  • chilmans37blog  On फ़रवरी 27, 2013 at 20:25

    Reblogged this on Chilmans37blog's Blog and commented:
    रास्ते नए हों-न-हों मंजिल नई हो
    भटकने की तो बात दिगर
    मज़ा तो तब आए जब
    मंजिल को पाने की मुश्किल नई हो?

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